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सच्चाई
एक दोस्त नेमुझसेकहा, “मैंने एक भजन को WAV में बदल लिया है, अब ” वह स्टूडियो क्वालिटी मेंबजेगा। मैंनेमुस्कुराकर पूछा, “पहले वह भजन यूट्यूब पर किस क्वालिटी मेंथा?” वह चुप हो गया। यही वह सवाल हैजो WAV और FLAC की पूरी कहानी खोल देता है। फाइल का नाम बदल देनेसेआवाज अपनेआप बेहतर नहीं हो जाती। इस लेख मेंहम WAV और FLAC को बिना बढ़ा-चढ़ाकर समझेंगे। येफॉर्मेट क्या हैं, कब काम आतेहैं, कब सिर्फ जगह घेरतेहैं, और यूट्यूब सेली गई आवाज के साथ इनकी असल सीमा क्या है। कोई झूठा वादा नहीं, कोई जादुई आँकड़ा नहीं।
पहलेबुनियाद समझिए: लॉसी और लॉसलेस क्या है
ऑडियो को सहेजनेके दो आम तरीके हैं। पहला तरीका वह हैजिसमेंफाइल छोटी करनेके लिए कुछ जानकारी हटा दी जाती है। MP3 इसी तरह का फॉर्मेट है। यह आवाज के उन हिस्सों को कम कर देता हैजो आम कान को कम सुनाई देतेहैं। फाइल हल्की हो जाती है, फोन मेंआसानी सेसमा जाती है, और रोज सुननेके लिए काफी अच्छी लगती है। दूसरा तरीका वह हैजिसमेंजानकारी हटाई नहीं जाती। WAV और FLAC इसी श्रेणी मेंआतेहैं। WAV आमतौर पर बिना दबाव के आवाज सहेजता है, इसलिए फाइल बड़ी होती है। FLAC भी जानकारी बचाकर रखता है, लेकिन उसेथोड़ा सलीके से समेट देता है, इसलिए फाइल WAV से छोटी होती है, फिर भी पूरी जानकारी बची रहती है। यह फर्क समझना जरूरी है, क्योंकि यहीं सेगलतफहमी शुरू होती है। लोग सोचतेहैंकि लॉसलेस नाम सुनतेही आवाज अपने आप शानदार हो जाएगी। असल मेंलॉसलेस का मतलब यह हैकि जो आवाज दी गई है, उसे बिना और घटाए सहेजा जाएगा। अगर दी गई आवाज पहलेसेही दबाई हुई है, तो लॉसलेस फाइल उसेवापस नहीं ला सकती।
यूट्यूब की आवाज पहलेसेही कैसी होती है
यूट्यूब पर वीडियो चलतेसमय आवाज को इंटरनेट पर भेजनेलायक बनानेके लिए पहलेसेही दबाया जाता है। यह कोई छिपी बात नहीं है। वीडियो को दुनिया भर मेंलाखों लोगों तक पहुँचाना है, इसलिए फाइल को हल्का रखना जरूरी होता है। इसका मतलब यह हैकि यूट्यूब सेमिलनेवाली आवाज का शुरुआती रूप ही पूरी तरह खुला हुआ नहीं होता। अब इसेएक उदाहरण सेसमझिए। मान लीजिए आपके पास एक तस्वीर की छोटी कॉपी है, जिसमें कुछ बारीकियाँपहलेही धुँधली हो चुकी हैं। आप उस तस्वीर को बड़ेकागज पर छाप दें, तो कागज बड़ा हो जाएगा, लेकिन धुँधली बारीकियाँवापस साफ नहीं होंगी। यूट्यूब सेWAV बनाना कुछ-कुछ ऐ सा ही है। फाइल बड़ी हो जाती है, फॉर्मेट लॉसलेस हो जाता है, लेकिन आवाज की असल जानकारी वही रहती हैजो यूट्यूब नेदी थी। इसलिए यह कहना गलत होगा कि यूट्यूब सेबना WAV स्टूडियो क्वालिटी का हो गया। यह कहना सही होगा कि WAV में बदलने के बाद आवाज को आगेऔर नुकसान पहुँचाए बिना सहेजा गया है। यह फर्क छोटा लगता है, लेकिन ईमानदारी के लिहाज सेबहुत बड़ा है।
फिर WAV कब काम आता है
अगर WAV आवाज को बेहतर नहीं बनाता, तो फिर लोग इसेक्यों चुनतेहैं? जवाब एडिटिंग मेंहै। मान लीजिए आप अपनेकिसी वीडियो का ऑडियो काटना चाहतेहैं, उसमें अपनी आवाज मिलानी है, या किसी लेक्चर के हिस्सों को अलग-अलग कर ना है। अगर आप बार-बार MP3 मेंसहेजेंगे, तो हर बार थोड़ी जानकारी और घटेगी। WAV में काम करनेपर यह दोबारा घटनेका सिलसिला रुक जाता है। आप एक बार WAV में लेआइए, फिर ए डिट कीजिए, और आखिर मेंजरूरत के हिसाब सेMP3 या किसी और फॉर्मेट मेंबदल दीजिए। इसी तरह, अगर आप किसी पुरानी रिकॉर्डिंग, अपने गाए हुए भजन, या अपनेलेक्चर को लंबेसमय के लिए सुरक्षित रखना चाहतेहैं, तो WAV एक अ च्छा संग्रह फॉर्मेट है। यह हर जगह खुल जाता है, और ज् यादातर एडिटिंग सॉफ्टवेयर इसेसीधे पहचान लेतेहैं।
FLAC कब बेहतर विकल्प है
FLAC का फायदा जगह बचानेमेंहै। यह जानकारी बचाकर रखता है, लेकिन फाइल को थोड़ा समेट देता है। इसलिए अगर आप अप ना ऑडियो संग्रह लंबेसमय तक रखना चाहतेहैं, लेकिन फोन की जगह भी बचानी है, तो FLAC एक समझदारी भरा बीच का रास्ता है। हाँ, एक बात ध्यान रखिए। हर पुराना प्लेयर FLAC को नहीं चलाता। ज्यादातर नए फोन और कंप्यूटर इसेचला लेतेहैं, लेकिन किसी पुरानेडिवाइस या कार के प्लेयर मेंयह अटक सकता है। इसलिए FLAC चुनने सेपहलेयह देख लीजिए कि आप उ सेकहाँसुननेवालेहैं। रोज सुननेके लिए, जैसे सफर मेंगाना सुनना या सुबह की सैर मेंलेक्चर सुनना, MP3 ही काफी होता है। वहाँWAV या FLAC की बड़ी फाइल सिर्फ जगह घेरेगी, आवाज मेंकोई ऐसा फर्क नहीं लाएगी जो आम कान को साफ सुनाई दे।
WAV, FLAC, और MP3 की सीधी तुलना
MP3 हल्का है, हर जगह चलता है, और रोज सुननेके लिए ठीक है। इसकी कमी यह हैकि हर बार सहेजनेपर थोड़ी जानकारी घट सकती है।
WAV भारी है, हर जगह लगभग चलता है, और ए डिटिंग के लिए सबसेसीधा है। इसकी कमी सिर्फ इसका आकार है। लंबा ऑडियो WAV में बहुत जगह लेलेता है।
FLAC जानकारी बचाता हैऔर WAV से छोटा होता है। यह संग्रह के लिए अच्छा है, लेकिन हर डिवाइस मेंउतना आम नहीं है जितना MP3 या WAV है। इस तुलना सेएक बात साफ हो जाती है: कोई एक फॉर्मेट सबके लिए सबसेअच्छा नहीं है। आपकी जरूरत ही तय करती है कि कौन सा फॉर्मेट ठीक है।
यूट्यूब से ऑडियो लेनेका सीधा तरीका
अगर आप अप नेकिसी वीडियो, पब्लिक-डोमेन रिकॉर्डिंग, या क्रिएटिव कॉमन्स ऑडियो को सहेजना चाहतेहैं, तो तरीका सीधा है। पहलेवीडियो का लिंक कॉपी कीजिए। फिर ब्राउज़र में यूट्यूब से MP3 ऑडियो पानेवाला पेज खोलिए, लिंक डालिए, और ऑ डियो का विकल्प चुनिए। अगर आपको एडिटिंग के लिए WAV या FLAC चाहिए, तो उस ऑडियो को अपने कंप्यूटर पर किसी भरोसेमंद कनवर्टर सेबदल लीजिए। यहाँ एक बात फिर दोहरा दूँ। कनवर्टकरनेके बाद फाइल का नाम WAV या FLAC हो जाएगा, लेकिन उसकी आवाज की असल गुणवत्ता वही रहेगी जो यूट्यूब के सोर्समेंथी। इसेसमझकर चलेंगे, तो न आपको निराशा होगी, न आप किसी और को गलत उम् मीद देंगे।
आम गलतियाँजिनसेबचना चाहिए
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डाउनलोडर टूल खोलें →पहली गलती: यह सोचना कि बड़ा फॉर्मेट मतलब बेहतर आवाज। फॉर्मेट सिर्फ डिब्बा है, आवाज तो वही हैजो अंदर डाली गई है। दूसरी गलती: रोज सुननेके लिए WAV सहेजकर फोन भर लेना। इससेबैटरी और जगह दोनों पर दबाव पड़ता है, फायदा कुछ खास नहीं मिलता। तीसरी गलती: किसी और के गानेया एल्बम को WAV में बदलकर यह सोचना कि अब वह आपका हो गया। फॉर्मेट बदलने से अधिकार नहीं बदलता। चौथी गलती: बिना जाँचेकिसी अनजान कनवर्टर सेफाइल बदलना। हमेशा जाने-पहचाने फॉर्मेट और भरोसेमंद तरीके सेही काम कीजिए।
आखिर में क्या याद रखिए
WAV और FLAC बुरे फॉर्मेट नहीं हैं। वेअपनेकाम के लिए बहुत अच्छेहैं। बस उनका काम आवाज को जादू सेबेहतर बनाना नहीं है, बल्कि मिली हुई आवाज को बिना और घटाए संभालकर रखना है। यूट्यूब सेली गई आवाज के मामलेमेंयही ईमानदार सच है। अगर आप ए डिटिंग कर रहेहैं, तो WAV लीजिए। अगर आप संग्रह बना रहेहैंऔर जगह बचानी है, तो FLAC सोचिए। अगर आप सिर्फ सुनना चाहतेहैं, तो MP3 ही काफी है। सही चुनाव वह हैजो आपकी जरूरत सेमेल खाए, न कि वह जो सबसे भारी नाम वाला हो। कॉपीराइट नोट: सिर्फ अपनेऑडियो-वीडियो, पब्लिक-डोमेन सामग्री, या क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेंस वाली सामग्री ही डाउनलोड और बदलिए। क्रिएटर के अधिकार का सम्मान कीजिए और किसी और के काम को बिना इजाजत आगेमत बाँटिए।